उत्तराखंड में Madarsa Board खत्म… फिर भी ‘ट्यूशन’ के नाम पर जारी तालीम? देखिए हमारी ग्राउंड रिपोर्ट
1 जुलाई से उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त होने के फैसले के बाद राज्यभर में इसकी चर्चा तेज हो गई है। सरकार के फैसले के बाद सवाल उठने लगे कि क्या इससे मदरसों में पढ़ाई पूरी तरह बंद हो जाएगी, या फिर किसी अन्य व्यवस्था के तहत शिक्षा जारी रहेगी?
इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए हमारी टीम ग्राउंड पर पहुंची। जो तस्वीर सामने आई, उसने कई नए सवाल खड़े कर दिए।
क्या मिला ग्राउंड रिपोर्ट में?
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान हमारी टीम एक ऐसे स्थान पर पहुंची जहां बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि यह “ट्यूशन” के रूप में चल रहा है। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई फिलहाल जारी है।
उनका कहना था कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से इस मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है और अब सभी की नजर 8 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर है। उनका कहना था कि अदालत के फैसले के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
सरकार ने क्या फैसला लिया है?
उत्तराखंड सरकार ने 1 जुलाई से राज्य के मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का फैसला लागू किया। सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को नई नीति और नियमों के अनुरूप व्यवस्थित किया जाएगा। इस फैसले को लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस जारी है।
ट्यूशन या मदरसा शिक्षा?
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सामने आया कि संबंधित लोग इसे ट्यूशन बता रहे थे। हालांकि यह सवाल भी उठ रहा है कि वहां दी जा रही शिक्षा का स्वरूप क्या है और क्या यह सरकार के नए नियमों के अनुरूप है। इस पर अंतिम स्थिति संबंधित अधिकारियों की जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
8 जुलाई की सुनवाई क्यों अहम है?
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तारीख 8 जुलाई मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि नैनीताल हाईकोर्ट में दायर याचिका पर इसी दिन सुनवाई होनी है।
उत्तराखंड में 1 जुलाई से मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद भी कुछ स्थानों पर ट्यूशन के नाम से बच्चों की पढ़ाई जारी होने का दावा सामने आया। क्योंकि सरकार के फैसले के बाद भी कुछ जगहों पर शिक्षा गतिविधियां जारी दिखीं और इस विषय पर कानूनी प्रक्रिया भी चल रही है। 1 जुलाई को सरकार का फैसला लागू हुआ। 8 जुलाई को नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है।
उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान ऐसे स्थानों का दौरा किया गया जहां पढ़ाई जारी होने की बात कही गई। सरकार, संबंधित शिक्षण संस्थान, वहां मौजूद संचालक, अभिभावक, बच्चे और याचिका दायर करने वाली संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद इस पूरे मामले से जुड़े प्रमुख पक्ष हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान संबंधित लोगों से बातचीत में उन्होंने बताया कि वे फिलहाल इसे ट्यूशन के रूप में चला रहे हैं और हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने में अभी समय लग सकता है। एक ओर सरकार का निर्णय लागू हो चुका है, वहीं दूसरी ओर कुछ संस्थानों का कहना है कि वे अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में 8 जुलाई की सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।