उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल में रच दिए ये 10 इतिहास, आने वाली सदियां रखेंगी याद
Pushkar Singh Dhami Achievements: धामी सरकार के 10 ऐतिहासिक फैसले जिन्होंने बदला उत्तराखंड
देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति में 4 जुलाई 2021 सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि बदलाव की शुरुआत मानी जाती है। इसी दिन युवा नेता पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की कमान संभाली। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि कुछ ही वर्षों में उत्तराखंड कई ऐसे फैसलों का गवाह बनेगा, जिनकी चर्चा पूरे देश में होगी।
धामी सरकार ने कानून, प्रशासन, शिक्षा, निवेश, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान जैसे कई क्षेत्रों में ऐसे निर्णय लिए, जिन्होंने उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई। समर्थक इन्हें ऐतिहासिक उपलब्धियां बताते हैं, जबकि विपक्ष कुछ फैसलों पर सवाल भी उठाता रहा है। लेकिन इतना तय है कि इन निर्णयों ने राज्य की राजनीति और प्रशासन की दिशा बदल दी।
देश का पहला राज्य बना जहां लागू हुआ यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)
पुष्कर सिंह धामी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करना मानी जाती है। उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना जिसने इस कानून को लागू किया। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का दावा किया गया। इस कदम ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया।
भाजपा के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड
उत्तराखंड बनने के बाद राज्य में राजनीतिक अस्थिरता लंबे समय तक बनी रही और मुख्यमंत्री बार-बार बदलते रहे। लेकिन पुष्कर सिंह धामी ने इस सिलसिले को तोड़ा। वे लगातार पांच वर्ष पूरे करने वाले पहले भाजपा मुख्यमंत्री बनने की दिशा में इतिहास रच चुके हैं, जबकि पूरे राज्य के इतिहास में भी यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
उत्तराखंड की सत्ता विरोधी परंपरा तोड़ी
राज्य गठन के बाद हर विधानसभा चुनाव में सरकार बदलती रही थी। वर्ष 2022 में भाजपा ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर इस राजनीतिक मिथक को तोड़ दिया। खास बात यह रही कि खटीमा से चुनाव हारने के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने धामी पर भरोसा कायम रखा और बाद में वे चंपावत उपचुनाव जीतकर दोबारा मुख्यमंत्री बने।
भर्ती परीक्षाओं के लिए देश के सबसे सख्त एंटी-कॉपीिंग कानूनों में एक
पेपर लीक की घटनाओं के बाद धामी सरकार ने कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया। सरकार का दावा है कि इस कानून के बाद भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी, नकल माफिया पर कार्रवाई हुई और युवाओं का भरोसा दोबारा मजबूत हुआ।
भू-कानून को बनाया अधिक सख्त
राज्य की जमीनों की सुरक्षा लंबे समय से बड़ा राजनीतिक मुद्दा रही है। धामी सरकार ने भूमि कानून में बदलाव कर बाहरी लोगों द्वारा कृषि भूमि खरीद पर नियंत्रण के प्रावधानों को मजबूत करने का कदम उठाया। इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान की सुरक्षा से जोड़कर देखा गया।
धर्मांतरण विरोधी कानून को और कड़ा बनाया
सरकार ने अवैध धर्मांतरण रोकने के उद्देश्य से कानून को अधिक सख्त बनाया। समर्थकों ने इसे सामाजिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए आवश्यक बताया, जबकि विपक्ष ने कुछ प्रावधानों पर सवाल भी उठाए। इसके बावजूद यह निर्णय राज्य की प्रमुख नीतिगत उपलब्धियों में शामिल रहा।
शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव और मदरसा बोर्ड समाप्त
धामी सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा निर्णय लेते हुए मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू की। सरकार का कहना है कि इससे आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा तथा शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।
निवेश और रोजगार को नई रफ्तार
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से उत्तराखंड में बड़े निवेश आकर्षित करने का प्रयास किया गया। उद्योग, पर्यटन, कृषि, हॉर्टिकल्चर और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया। सरकार का दावा है कि इससे आने वाले वर्षों में लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
चारधाम, पर्यटन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस
धामी सरकार के दौरान चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं, सड़क संपर्क, रोपवे परियोजनाओं और पर्यटन ढांचे को मजबूत करने पर लगातार काम हुआ। साथ ही खेल सुविधाओं और आधुनिक सार्वजनिक अवसंरचना का भी विस्तार किया गया, जिससे राज्य की विकास गति को नई दिशा मिली।
आपदा प्रबंधन में तकनीक आधारित नई सोच
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए आपदा प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती है। धामी सरकार ने राहत और बचाव के पारंपरिक मॉडल से आगे बढ़ते हुए तकनीक आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम, जोखिम कम करने की रणनीति और बेहतर तैयारी पर जोर दिया। विशेषज्ञ इसे भविष्य की आपदाओं से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव मानते हैं।
क्या आने वाली पीढ़ियां धामी युग को याद रखेंगी?
उत्तराखंड की राजनीति में पुष्कर सिंह धामी का कार्यकाल कई मायनों में अलग दिखाई देता है। समान नागरिक संहिता, सख्त एंटी-कॉपीिंग कानून, भू-कानून में बदलाव, शिक्षा सुधार, निवेश, पर्यटन और प्रशासनिक फैसलों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनाया है।
हालांकि बेरोजगारी, पलायन, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है। फिर भी यह कहना गलत नहीं होगा कि धामी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं जो उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में लंबे समय तक दर्ज रहेंगे। आने वाले वर्षों में इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक इन निर्णयों के वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन करेंगे, लेकिन वर्तमान समय में उनका कार्यकाल राज्य की सबसे चर्चित अवधियों में गिना जा रहा है।