Uttarakhand Uppradhan Election 2026: प्रदेश की 7,466 ग्राम पंचायतों में 15 जुलाई को उपप्रधानों का चुनाव, अधिसूचना जारी, हरिद्वार रहेगा बाहर
Uttarakhand Uppradhan Election 2026: उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश की 7,466 ग्राम पंचायतों में उपप्रधान (उप-प्रधान) के चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 15 जुलाई को प्रदेशभर में उपप्रधानों का चुनाव कराया जाएगा। हालांकि इस प्रक्रिया में हरिद्वार जिला शामिल नहीं होगा।
यह चुनाव हाल ही में संपन्न हुए ग्राम प्रधान चुनाव के बाद पंचायतों के प्रशासनिक ढांचे को पूर्ण करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। उपप्रधान ग्राम पंचायत के संचालन में प्रधान का सहयोगी होता है और कई प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करता है।
15 जुलाई को होगा चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार प्रदेश की सभी पात्र ग्राम पंचायतों में 15 जुलाई को उपप्रधान पद के लिए चुनाव होगा। इस प्रक्रिया के लिए सभी जिलों के जिला प्रशासन और विकास विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
ग्राम पंचायतों में निर्वाचित प्रधान और वार्ड सदस्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपप्रधान का चुनाव करेंगे। चुनाव की पूरी प्रक्रिया आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संपन्न कराई जाएगी।
हरिद्वार जिला क्यों नहीं है शामिल?
इस बार उपप्रधान चुनाव की प्रक्रिया में हरिद्वार जिला शामिल नहीं किया गया है। इसकी वजह यह है कि हरिद्वार जिले में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया अन्य जिलों से अलग समय पर आयोजित होती है। इसलिए वहां उपप्रधान का चुनाव भी बाद में कराया जाएगा।
उपप्रधान की क्या होती है भूमिका?
ग्राम पंचायत में उपप्रधान का पद (Uttarakhand Uppradhan Election 2026) काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। उपप्रधान, ग्राम प्रधान की अनुपस्थिति में पंचायत की बैठकों की अध्यक्षता कर सकता है और पंचायत के विकास कार्यों में सहयोग देता है। इसके अलावा कई प्रशासनिक एवं विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी उपप्रधान की सक्रिय भूमिका रहती है।
पंचायत व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि उपप्रधानों के चुनाव के बाद ग्राम पंचायतों का प्रशासनिक ढांचा और अधिक मजबूत होगा। इससे ग्रामीण विकास योजनाओं के संचालन में गति आएगी और पंचायत स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनेगी।
उत्तराखंड सरकार लगातार ग्रामीण विकास, आधारभूत सुविधाओं और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। उपप्रधानों का चुनाव भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रदेश की 7,466 ग्राम पंचायतों में 15 जुलाई को होने वाला उपप्रधान चुनाव ग्रामीण लोकतंत्र को और मजबूत करेगा। हरिद्वार को छोड़कर बाकी जिलों में चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अब सभी की नजर इस प्रक्रिया के शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न होने पर रहेगी।